[80+] ज़िम्मेदारी पर शायरी || Jimmedari Shayari in Hindi

Jimmedari Shayari In Hindi

Welcome everyone to our Jimmedari Shayari blog . Jiwan sangarsh se bhar hua hai sabhi ka
isiliye sabhi k kandho me kuch na kuch jimmedari hoti hai . Ussi jimmedari ko yaad rakhne k liye aap sabhi k liye
kuch unique and best jimmedari shayari laye hai . Aasha karte hai ki aapko sabhi shayari pasand aaye.

खुद को खुश रखना ये आपकी 
एक बहुत बड़ी 
गरीबी पर शायरी
जिम्मेदारी चेहरे की रंगत बदल देती हे
शोक से तो कोई शख्स बुजा
नहीं रहता। 
अपनी जिम्मेदारियां से भागने 
वाला व्यक्ति कभी श्रेस्ठ
नहीं बन सकता। 
क्या खूब मज़बूरी हे गले में 
लगे पेड़ो को  
हरा भी रहना है और बढ़ना भी हे.. 
शोहरत बेशक चुपचाप गुजर जाये
कमख्त बदनामी बड़ा 
शोर मचाती है...
छोटी भी है बड़ी भी है 
ऐसी हज़ारो जिम्मेदारियां है
इसलिए तो हमें सिर्फ चाय से यारी है,
जब जिम्मेदारियां कंधो पे आती है 
तब पता चलता हे
जिन्दगी क्या चीज है। 
जब जिम्मेदारियां बड़ी होती है 
तब कोई काम छोटा या 
बड़ा नहीं होता। 
क्या बेचकर खरीदे फुरसत तुजसे 
ए जिंदगी 
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है। 
जीवन बदलने वाली शायरी
बस मेरी ख़ुशीया में हिस्सेदारी 
कर लेना तुम
सारे गमो की जिम्मेदारी में ले लूंगा।
दुनिया वालो ने बहुत कोशिश की
हमें रुलाने की
मगर उपर वाले ने जिम्मेदारी उठा रखी है
हमें हँसा ने के लिए.....
जिम्मेदारियां के आगे कई बार 
सपने हार जाते है। 
लड़कियों अपनी ख्वाहिशे माँ 
को ही बताती है
ससुराल में तो सिर्फ वो जिम्मेदारियां 
निभाती है। 
हमें अपने आप को नहीं अपनी 
जिम्मेदारियों को गंभीरता
से लेना चाहिए। 
जिम्मेदारियों को उठाने से क्यों
घभराते हो 
जिंदगी में यही तो इंसान को 
हुन्नरमंद बनाता है। 
उदा देती है नींदे कुछ जिम्मेदारियां घर की 
रात में जगने वाला हर कोई शख्स 
आशिक नहीं होता। 
गर्मी बहुत थी दोस्तों अपने भी 
खून में पर 
घर की जिम्मेदारियों ने झुकना 
सिखा दिया।
दूनिया की सबसे बेहतर दवाई है
जिम्मेदारी 
एक बार पि लीजिये साहब जिंदगी 
भर थकने नहीं देगी। 
रैक आपको विशेषाधिकार या 
शक्ति नहीं देती
ये आपके ऊपर जिम्मेदारी डालती है 
कुछ इसलिए भी ख्वाईशो को मार देता हूँ 
माँ कहती है घर की जिम्मेदारी है
तुझ पर। 

Jimmedari Shayari

बहाने बनाना बद करो दो 
जिम्मेदारी लेना शुरू करो। 
जिन्हे अपनी जिम्मेदारी समझ आ जाती है
उन्हें जिंदगी में परेशानियां दूर तक 
नजर नहीं आती है। 
जिम्मेदारी लेना मुसिबत 
की बात नहीं
बल्कि आज़ादी की घोषणा है। 
मजबूरियाँ देर रात तक जगाती है
साहेब और  
जिम्मेदारियां सुबह जल्दी उठाती हे। 
विरासत में हमेशां जागीर और सोना चांदी 
नहीं मिलते जनाब 
कभी कभी जिम्मेदारियां भी मिल जाती है। 
एक मल युद्ध चल रहा है मन मस्तिष्क में मेरे,
जिम्मेदारी ने धोबिपछाड़ दी है इच्छाओं को मेरे
ज़रूरतें, जिम्मेदारियां, ख़्वाहिशें..
यूँ ही तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है….
ये जो जिम्मेदारियां हैं ना बड़ी बद्तमीज़ हैं,
ख़्वाहिशों को कैसे समझौतों में बदल देती हैं….
ज़िन्दगी ने बहुत कौशीशें की मुझे रुलाने की,
मगर डमरूवाले ने जिम्मेदारी उठा रखी है मुझे हँसाने की….
जिम्मेदारियों का बोझ पीठ पर पसीना दे जाएगा,
दिल तुम्हारा कभी मचलेगा जब बारिश में भीगने को….
ख्वाहिशें जैसे कोई पतंग हों,
जिम्मेदारियां जब कंधे पर आती हैं
तो हम उन्हें हवा में भी उड़ान सीख जाते हैं
इक उम्र ख्वाहिशों के लिए भी नसीब हो,
ये वाली तो बस…. जिम्मेदारियों में ही गुज़र गई….
जिम्मेदारियों ने ख्वाहिशों के कान में ना जाने क्या फुसफुसाया,
कि ख्वाहिशें, झुर्रियां और जिम्मेदारियां जवाँ हो गयी….
क्या बेचकर हम खरेदें तुझे ऐं ज़िन्दगी,
सब कुछ तो गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाज़ार में

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